हिंदी साहित्य (Hindi Literature) का संसार बहुत विशाल है। इसमें कहानियाँ हैं, कविताएँ हैं और नाटक भी हैं। लेकिन अक्सर जब हम स्कूल में होते हैं या हिंदी साहित्य पढ़ रहे होते हैं, तो एक सवाल हमें बहुत कंफ्यूज करता है – natak or ekanki me antar (नाटक और एकांकी में अंतर)।
क्या ये दोनों एक ही हैं? या इनमें जमीन-आसमान का फर्क है?
दोस्तों, अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आज के इस लेख में हम बिल्कुल आसान भाषा में (जैसे एक दोस्त दूसरे दोस्त को समझाता है) बात करेंगे कि natak aur ekanki mein kya antar hai। चाहे आप स्कूल का प्रोजेक्ट बना रहे हों या किसी सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, यह गाइड आपके लिए ही है।
चलिए, साहित्य के इस मंच पर से पर्दा उठाते हैं और जानते हैं ekanki or natak me antar विस्तार से!
सबसे पहले: नाटक क्या है? (What is Natak in Hindi)
इससे पहले कि हम अंतर की बात करें, हमें यह समझना होगा कि आखिर ये दोनों बलाएँ हैं क्या। शुरुआत करते हैं ‘नाटक’ से।
सरल शब्दों में कहें तो, नाटक (Drama) हिंदी साहित्य की वह विधा है जिसे ‘दृश्य काव्य’ (Visual Poetry) कहा जाता है। यानी ऐसी रचना जिसे सिर्फ पढ़ा नहीं जाता, बल्कि आँखों से देखा भी जाता है (स्टेज पर)।
नाटक का मतलब है किसी कहानी को अभिनय (Acting), संवाद (Dialogue), वेशभूषा (Costume) और संगीत के जरिए दर्शकों के सामने पेश करना। इसमें जीवन के कई पहलुओं को दिखाया जाता है। नाटक का कैनवास बहुत बड़ा होता है।
नाटक की मुख्य बातें:
- इसमें जीवन की विस्तृत झलक होती है।
- इसमें कई सारी घटनाएँ एक साथ चलती हैं।
- इसे पूरा देखने में कई घंटे लग सकते हैं।
उदाहरण: जयशंकर प्रसाद का ‘चंद्रगुप्त’ या मोहन राकेश का ‘आषाढ़ का एक दिन’।
अब जानते हैं: एकांकी क्या है? (What is Ekanki in Hindi)
अब बात करते हैं एकांकी की। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है – ‘एक + अंक’ = एकांकी (One Act Play)।
एकांकी नाटक का ही एक छोटा रूप है, लेकिन यह नाटक का ‘छोटा भाई’ नहीं है, बल्कि अपने आप में एक स्वतंत्र विधा है। एकांकी वह नाटक है जो सिर्फ एक ही अंक (One Act) में खत्म हो जाता है।
सोचिए, अगर नाटक एक पूरी ‘फीचर फिल्म’ है, तो एकांकी एक ‘शॉर्ट फिल्म’ (Short Film) की तरह है। इसमें पूरी जिंदगी की कहानी नहीं होती, बल्कि जीवन की किसी एक महत्वपूर्ण घटना को दिखाया जाता है। यह बहुत तेजी से शुरू होती है और तेजी से अपने क्लाइमेक्स (Climax) पर पहुंचकर खत्म हो जाती है।
एकांकी की मुख्य बातें:
- इसमें केवल एक ही मुख्य घटना होती है।
- यह बहुत कम समय (20-40 मिनट) में खत्म हो जाती है।
- इसका उद्देश्य किसी एक समस्या या विचार पर फोकस करना होता है।
उदाहरण: डॉ. रामकुमार वर्मा की ‘दीपदान’ या विष्णु प्रभाकर की ‘सीमा रेखा’।
Natak Or Ekanki Me Antar (Main Differences in Detail)

अब आते हैं अपने मुख्य टॉपिक पर – natak or ekanki me antar। परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के लिए आपको इन अंतरों को बारीकी से समझना होगा। चलिए, इन्हें अलग-अलग बिंदुओं (Points) के जरिए समझते हैं।
1. आकार और विस्तार (Size and Scope)
सबसे बड़ा और साफ़ अंतर इनके आकार का है।
- नाटक: इसका आकार बहुत बड़ा और विस्तृत होता है। इसमें नायक के जीवन की पूरी तस्वीर या कई सालों का इतिहास दिखाया जा सकता है।
- एकांकी: इसका आकार बहुत छोटा और सीमित होता है। यह जीवन के किसी एक टुकड़े या एक खास पल को पकड़ती है और उसी को दिखाती है।
2. अंकों की संख्या (Number of Acts)
यह सबसे तकनीकी अंतर है जिसे आपको अपने ekanki or natak me antar project में जरूर लिखना चाहिए।
- नाटक: नाटक में अनेक अंक (Multiple Acts) होते हैं। यह 3, 5, 7 या इससे भी ज्यादा अंकों में बंटा हो सकता है। हर अंक के बाद पर्दा गिरता है और दृश्य बदलता है।
- एकांकी: एकांकी में केवल एक अंक (One Act) होता है। इसमें बार-बार पर्दा नहीं गिरता। कहानी एक ही सांस में शुरू होकर खत्म हो जाती है।
3. कथावस्तु (Plot/Storyline)
- नाटक: नाटक की कथावस्तु जटिल होती है। इसमें एक मुख्य कथा (Main Story) होती है और उसके साथ-साथ कई सहायक कथाएँ (Sub-plots) भी चलती हैं। (जैसे फिल्म में हीरो की कहानी के साथ-साथ विलेन या कॉमेडियन की अलग कहानी चलती है)।
- एकांकी: एकांकी में एक ही कथा और एक ही घटना होती है। इसमें सहायक कहानियों (Side stories) के लिए कोई जगह नहीं होती। कहानी सीधी लकीर की तरह आगे बढ़ती है।
4. पात्रों की संख्या (Number of Characters)
- नाटक: चूंकि नाटक की कहानी बड़ी होती है, इसलिए इसमें पात्रों की संख्या अधिक होती है। इसमें मुख्य पात्रों के अलावा भीड़, सैनिक, नौकर आदि कई गौण पात्र भी हो सकते हैं।
- एकांकी: एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत कम (सीमित) होती है। आमतौर पर 2 से 4 मुख्य पात्र ही होते हैं। ज्यादा भीड़-भाड़ एकांकी के प्रभाव को कम कर देती है।
5. समय (Time Duration)
- नाटक: नाटक का मंचन (Staging) करने में अधिक समय लगता है। यह 3 घंटे या उससे ज्यादा भी चल सकता है। इसमें चरित्र का विकास धीरे-धीरे दिखाया जाता है।
- एकांकी: एकांकी का अभिनय कम समय में हो जाता है। यह आमतौर पर 15 मिनट से लेकर 45 मिनट तक की होती है। इसमें सब कुछ बहुत तेज़ी से घटित होता है।
6. उद्देश्य (Objective)
- नाटक: नाटक का उद्देश्य दर्शकों को रस की अनुभूति कराना और जीवन के विविध रूपों को दिखाना होता है। इसमें पात्रों का चरित्र-चित्रण (Character Development) विस्तार से होता है।
- एकांकी: एकांकी का उद्देश्य किसी एक समस्या, विचार या संवेदना को गहरायी से चोट करना होता है। यह दर्शकों के दिल पर तुरंत असर डालती है।
तुलना तालिका: Natak aur Ekanki mein Antar Table
अगर आप एग्जाम में यह टेबल बनाकर आएंगे, तो टीचर आपको पूरे नंबर देंगे। यह natak or ekanki me antar in hindi को याद रखने का सबसे आसान तरीका है।
| क्रमांक | आधार (Basis) | नाटक (Drama) | एकांकी (One Act Play) |
| 1. | अंक (Acts) | नाटक में कई अंक (3 या अधिक) होते हैं। | एकांकी में केवल एक ही अंक होता है। |
| 2. | कथावस्तु (Story) | इसमें मुख्य कथा के साथ-साथ गौण (छोटी) कथाएँ भी जुड़ी रहती हैं। | इसमें केवल एक ही आधिकारिक कथा या घटना होती है। |
| 3. | पात्र (Characters) | नाटक में पात्रों की संख्या अधिक होती है। | एकांकी में पात्रों की संख्या सीमित (कम) होती है। |
| 4. | विस्तार (Scope) | नाटक में जीवन का विस्तृत और व्यापक चित्रण होता है। | एकांकी में जीवन के किसी एक पहलू या क्षण का चित्रण होता है। |
| 5. | समय (Time) | इसका मंचन करने में अधिक समय (2-3 घंटे) लगता है। | यह कम समय (30-45 मिनट) में समाप्त हो जाती है। |
| 6. | विकास (Development) | इसमें चरित्र और घटना का विकास धीरे-धीरे होता है। | इसमें घटना और चरित्र का विकास तीव्र गति (Fast pace) से होता है। |
| 7. | उदाहरण (Example) | ‘चंद्रगुप्त’ (जयशंकर प्रसाद) | ‘दीपदान’ (डॉ. रामकुमार वर्मा) |
नाटक और एकांकी का उद्भव और विकास (History & Evolution)

अक्सर परीक्षाओं में या प्रोजेक्ट्स में यह भी पूछा जाता है कि आखिर नाटक और एकांकी की शुरुआत कैसे हुई? natak or ekanki me antar समझने के लिए उनके इतिहास को जानना भी जरुरी है।
हिंदी नाटक का इतिहास
हिंदी नाटकों की असली शुरुआत ‘भारतेन्दु युग’ से मानी जाती है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र को हिंदी नाटक का जनक (Father of Hindi Drama) कहा जाता है । उन्होंने ‘अंधेर नगरी’ और ‘सत्य हरिश्चंद्र’ जैसे नाटक लिखकर समाज को जगाने का काम किया। पहले नाटक संस्कृत से अनुवादित होते थे, लेकिन बाद में जयशंकर प्रसाद ने ऐतिहासिक नाटकों (जैसे चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी) के जरिए इसे नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया ।
हिंदी एकांकी का इतिहास
एकांकी का विकास थोड़ा बाद में हुआ। जब लोगों के पास समय कम होने लगा, तो कम समय में मनोरंजन के लिए एकांकी का जन्म हुआ। डॉ. रामकुमार वर्मा और भुवनेश्वर प्रसाद मिश्र जैसे लेखकों ने इसे लोकप्रिय बनाया। पश्चिम (Western Literature) के ‘One Act Play’ से प्रभावित होकर हिंदी में एकांकी लिखी जाने लगीं ।
नाटक और एकांकी के प्रकार (Types of Natak and Ekanki)
सिर्फ परिभाषा काफी नहीं है। अगर आपको क्लास में सबसे अच्छे नंबर चाहिए, तो आपको इनके प्रकारों (Types) के बारे में भी लिखना चाहिए।
नाटक के प्रमुख प्रकार (Types of Drama)
नाटक कई तरह के होते हैं, जो दर्शकों के मूड पर निर्भर करते हैं:
- त्रासदी (Tragedy): ऐसे नाटक जिनका अंत दुखद होता है। इसमें हीरो के साथ कुछ बुरा होता है जो दर्शकों को भावुक कर देता है ।
- कॉमेडी (Comedy): ये हंसाने वाले नाटक होते हैं। इनका उद्देश्य मनोरंजन करना और हंसाते-हंसाते समाज की बुराइयों पर चोट करना होता है ।
- ऐतिहासिक नाटक (Historical Drama): जो इतिहास की किसी सच्ची घटना (जैसे शिवाजी या महाराणा प्रताप) पर आधारित होते हैं।
- मेलोड्रामा (Melodrama): इसमें भावनाओं का बहुत ज्यादा प्रदर्शन होता है और संगीत का भरपूर इस्तेमाल होता है ।
एकांकी के प्रमुख प्रकार (Types of One Act Play)
एकांकी भी विषय के अनुसार कई प्रकार की होती हैं:
- सामाजिक एकांकी: जो हमारे समाज की समस्याओं (दहेज, गरीबी, भेदभाव) को दिखाती है ।
- ऐतिहासिक एकांकी: इतिहास के किसी एक छोटे किस्से पर आधारित ।
- चरित्र प्रधान एकांकी: जिसमें किसी एक व्यक्ति के स्वभाव या चरित्र पर पूरा फोकस होता है ।
- राजनीतिक एकांकी: जो राजनीति और नेताओं पर व्यंग्य करती है ।
नाटक और एकांकी के तत्व (Elements of Natak and Ekanki)

हालाँकि इन दोनों में बहुत अंतर है, लेकिन क्योंकि ये दोनों ही ‘दृश्य काव्य’ हैं, इनके तत्व (Elements) लगभग एक जैसे ही होते हैं। भारतीय साहित्य शास्त्र के अनुसार इनके मुख्य तत्व ये हैं:
- कथावस्तु (Plot): कहानी क्या है।
- पात्र एवं चरित्र चित्रण (Characters): कहानी को आगे बढ़ाने वाले लोग।
- संवाद (Dialogue): पात्रों की आपसी बातचीत (यह नाटक और एकांकी दोनों की जान है)।
- देश-काल वातावरण (Setting): कहानी किस समय और किस जगह की है।
- भाषा-शैली (Language Style): लिखने का तरीका।
- उद्देश्य (Purpose): लेखक क्या संदेश देना चाहता है।
- अभिनयता (Acting/Staging): क्या इसे स्टेज पर खेला जा सकता है?
ध्यान दें: एकांकी में ‘संकलन-त्रय’ (समय, स्थान और कार्य की एकता) का पालन करना बहुत जरुरी होता है, जबकि नाटक में इसमें थोड़ी छूट मिल सकती है।
हिंदी के प्रमुख नाटक और उनके रचनाकार (Famous Dramas)
अपने ekanki or natak me antar project को और भी बेहतरीन बनाने के लिए आप इन उदाहरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
- भारतेंदु हरिश्चंद्र: अंधेर नगरी, सत्य हरिश्चंद्र
- जयशंकर प्रसाद: ध्रुवस्वामिनी, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त
- मोहन राकेश: आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस
- धर्मवीर भारती: अंधा युग
हिंदी की प्रमुख एकांकी और उनके रचनाकार (Famous One Act Plays)
- डॉ. रामकुमार वर्मा: पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई
- भुवनेश्वर: कारवाँ, तांबे के कीड़े
- उपेंद्रनाथ अश्क: तौलिए
- जगदीश चंद्र माथुर: रीढ़ की हड्डी (यह स्कूलों में बहुत पढ़ाई जाती है)
नाटक और एकांकी: किसे लिखना या खेलना ज्यादा मुश्किल है?
बहुत से छात्र यह भी पूछते हैं कि क्या एकांकी लिखना आसान है क्योंकि वह छोटी है?
जवाब है – नहीं।
- नाटक (Natak): नाटक लिखने में लेखक को पूरी आजादी मिलती है। वह अपनी बात को विस्तार से कह सकता है ।
- एकांकी (Ekanki): एकांकी लिखना “गागर में सागर” भरने जैसा है। लेखक को बहुत कम समय में (20-30 मिनट) अपनी पूरी बात कहनी होती है, पात्रों का परिचय भी देना होता है और कहानी का अंत भी करना होता है। इसलिए, एकांकी में हर एक शब्द और हर एक डायलॉग बहुत नपा-तुला होना चाहिए ।
परीक्षा के लिए टिप्स: कैसे पहचानें कि यह नाटक है या एकांकी?
अगर आपको कोई किताब दी जाए और पूछा जाए कि यह natak hai ya ekanki, तो आप इन 3 निशानीयों से पहचान सकते हैं:
- दृश्य बदलना (Scene Change): अगर पढ़ते समय बार-बार दृश्य बदल रहे हैं (Scene 1, Scene 2…), तो संभव है कि वह नाटक है। अगर पूरी कहानी एक ही जगह चल रही है, तो वह एकांकी है।
- पात्रों की लिस्ट (List of Characters): अगर पात्रों की लिस्ट बहुत लंबी है (10-15 लोग), तो वह नाटक है । अगर लिस्ट छोटी है (3-5 लोग), तो एकांकी है।
- किताब की मोटाई: नाटक की किताब अक्सर मोटी (उपन्यास जैसी) होती है, जबकि एकांकी संग्रह में एक ही किताब में 5-6 अलग-अलग एकांकियां होती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
तो दोस्तों, आज हमने जाना कि natak or ekanki me antar क्या होता है। संक्षेप में कहें तो, अगर नाटक एक “उपन्यास” की तरह विशाल है, तो एकांकी एक “लघु कथा” की तरह संक्षिप्त और प्रभावशाली है ।
नाटक हमें जीवन के विभिन्न रंगों से रूबरू कराता है, जबकि एकांकी जीवन के किसी एक रंग को गहराई से दिखाती है । दोनों ही हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न हैं और दोनों का अपना अलग महत्त्व है ।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ – People Also Ask)
नाटक क्या है?
नाटक वह दृश्य विधा है जिसमें अभिनय, नृत्य और संवाद के जरिए कहानी प्रस्तुत की जाती है। इसमें मुख्य कथा के साथ सहायक कथाएं भी होती हैं ।
जो नाटक एक अंक में समाप्त होता है, उसे एकांकी कहते हैं। इसमें एक ही घटना का वर्णन होता है ।
एकांकी में केवल एक अंक होता है, पात्रों की संख्या कम होती है और यह कम समय में मंचित हो जाती है ।
कहानी विस्तृत होती है और उसमें नैतिक संदेश होता है, जबकि एकांकी संक्षिप्त होती है और उसमें संवाद (Dialogues) पर अधिक ध्यान दिया जाता है । कहानी में पात्रों और घटनाओं का विकास होता है, जबकि एकांकी में एक मुख्य घटना होती है ।
नाटक में अनेक अंक होते हैं, अधिक पात्र होते हैं, और मुख्य कहानी के साथ अन्य छोटी कहानियाँ भी जुड़ी होती हैं ।